परेश रावल के जन्मदिन पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़ी दिलचस्प बातें

किसी भी एक्टर के लिए इससे बड़ी बात और कोई नहीं हो सकती कि उसे उसके निभाए गए किरदार से पहचाना जाए। बॉलीवुड में ऐसे कम ही एक्टर हैं, जिन्हें उनके किरदार से पहचाना जाता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें बाबू भैया के नाम से जाना जाता है।

Bollywood Halchal May 30, 2020

किसी भी एक्टर के लिए इससे बड़ी बात और कोई नहीं हो सकती कि उसे उसके निभाए गए किरदार से पहचाना जाए। बॉलीवुड में ऐसे कम ही एक्टर हैं, जिन्हें उनके किरदार से पहचाना जाता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें बाबू भैया के नाम से जाना जाता है। परेश रावल को नेता बनने के बाद तो लोग जानते ही हैं। पर नेता से ज्यादा लोग उन्हें अभिनेता के रूप में जानते हैं। आप भी जानते ही होगें, बाबूराव गणपतराव आप्टे को जिनके डायलॉग का इस्तेमाल आदमी फोन पर बात करने में करता है।

30 मई को परेश रावल का हैप्पी बर्थडे है। 30 मई 1950 को मुंबई में जन्मे परेश पढ़ाई पूरी करने के बाद इंजीनियर बनने के लिए इधर-उधर भटके फिर इंडस्ट्री का रूख किया उनके साथ एक और लीजेंड ने इंडस्ट्री में एंट्री की थी। आमिर खान ने हीरो के रोल में फिल्मों की शुरुआत की और परेश रावल ने विलेन का रोल निभाया था।
 
इस बात पर परेश रावल ने बताया था- “भैया हम प्रोड्यूसर डायरेक्टर तो हैं नहीं। वो हमको जिस रोल के लिए चुनते हैं, हम उसके लिए जान लगा देते हैं। ऐसा होता है कि शुरू में जिस भूमिका में चल जाओ, वो फिर उसी में रिपीट करने लगते हैं। इसी बीच महेश भट्ट, केतन मेहता और दिबाकर बनर्जी जैसे डायरेक्टर भी हैं। जिन्होंने हमसे अलग भूमिका में काम कराने का रिस्क लिया।”

80 से 90 के दशक में परेश जी ने लगभग सभी फिल्मों में निगेटिव रोल किया। उस जमाने के लोग जो कुमार शानू और अजय देवगन के फैन थे। अब भी कभी-कभी “जीता था जिसके लिए…जिसके लिए मरता था” गुनगुनाते हैं। वो दिलवाले के अजय देवगन में अपना रूप देखते थे। मामा ठाकुर उन्हें सबसे ज्यादा गंदा दुश्मन लगता था, मामा ठाकुर जो परेश रावल थे।

दिलवाले से आगे निकल कर लोग बड़े और नौकरी चाकरी वाले हुए तो परेश रावल के कलेवर ने भी पल्टी मारी और 80 और 90 के दशक में विलेन और सरदार, तमन्ना जैसी कुछ फिल्मों में बहुत गंभीर किरदार निभाने के बाद परेश अब कॉमेडियन हो गए।

हेराफेरी के बाबूराव गणपतराव आप्टे अपने आप में एक खास किरदार है। मिडिल क्लास का कम कमाई और बड़े दिल वाला आदमी कैसा हो सकता है। उस रोल में परेश रावल के अलावा किसी और कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते।

स्वीमिंग पूल में बाल्टी से पानी निकाल कर नहाना सबके बस का नहीं है। उस रोल के बाद परेश जी ने कितने ही कॉमेडी रोल किए हैं। इन्होंने, आवारा पागल दीवाना, दीवाने हुए पागल, हंगामा, हलचल, चुप-चुपके, भागम-भाग और मालामाल वीकली में अभिनय से लोगों को लोटपोट किया।

निजी जीवन
परेश रावल की शादी स्वरूप सम्पत से हुई। शायद बहुत ही कम लोगो को पता होगा कि स्वरूप 1979 में मिस इंडिया रह चुकी हैं। उसके बाद उनका एक्टिंग करियर शुरू हुआ था। अपने निजी जीवन से जुड़ा एक किस्सा परेश ने शेयर किया, उन्होंने बताया कि “स्वरूप के पिता जी, इंडियन नेशनल थिएटर के प्रोड्यूसर थे। अपने दोस्तों के साथ मैं एक बंगाली ड्रामा देखने गया था तो वहां स्वरूप को देखा। मैंने अपने दोस्त से कहा कि ये लड़की मेरी वाइफ बनेगी। उसने पूछा जानते हो किसकी बेटी है? मैंने कहा कि मेरी वाइफ बनेगी बस।” परेश रावल की फैमिली में इनके दो बेटे आदित्य रावल और अनिरुद्ध हैं।

राजनीति में भी जुड़े

परेश रावल राजनीति ने मैदान में भी हाथ आजमाया उन्होंने अहमदाबाद, गुजरात से चुनाव लड़ा और विजयी भी हुए परेश रावल भारतीय जनता पार्टी के अच्छे राजनेता बन गए हैं। इनका राजनीतिक जीवन भी काफी अच्छा रहा है।

पुरस्कार और सम्मान
 
2014 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। परेश 1994 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहायक किरदार से सम्मानित हुए। इसके बाद इन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिल चुका है। यह केतन मेहता की फिल्म सरदार में स्वतंत्रता सेनानी वलभभाई पटेल के मुख्य किरदार में नजर आए थे।


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