पगलैट रिव्यू : पितृसत्ताक समाज की दकियानूसी सोच का आइना पेश करती है 'संध्या' की कहानी

इस फिल्म एक एक सीन में सान्या कहती हैं, "अगर हम अपने फैसले खुद नहीं लेंगे ना, तो दूसरे ले लेंगे।। फिर चाहे वो हमें पसंद हो या ना हो।" संध्या एक पढ़ी-लिखी लड़की है लेकिन उसकी शादी करवा दी जाती है।न उससे तब उसका पूछा जाता है कि वह क्या चाहती है और न पति के गुजरने के बाद।

Bollywood Halchal Mar 30, 2021

बॉलीवुड एक्ट्रेस सान्या मल्होत्रा की फिल्म 'पगलैट' का दर्शकों को बेसब्री से इंतज़ार था। यह फिल्म 26 मार्च को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गयी है। इस फिल्म एक एक सीन में सान्या कहती हैं, "अगर हम अपने फैसले खुद नहीं लेंगे ना, तो दूसरे ले लेंगे।। फिर चाहे वो हमें पसंद हो या ना हो।" संध्या एक पढ़ी-लिखी लड़की है लेकिन उसकी शादी करवा दी जाती है। न उससे तब उसका पूछा जाता है कि वह क्या चाहती है और न पति के गुजरने के बाद। उमेश बिष्ट द्वारा निर्देशित इस कॉमेडी ड्रामा फिल्म में समाज और परिवार के रूढ़िवादी और खोखली सोच को दिखने की कोशिश की गयी है। आज हम आपको बताएंगे कि यह फिल्म कैसी है - 

पगलैट की कहानी संध्या गिरी के इर्द-गिर्द घूमती है। लखनऊ में बसे गिरी परिवार की बहू संध्या गिरी के पति आस्तिक की अचानक मौत हो जाती है। संध्या और आस्तिक की शादी को अभी सिर्फ पांच महीने ही हुए थे। परिवार में मातम का माहौल है, रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ है और सब रो रहे हैं। ऐसे में पति के गुजर जाने के बाद तो संध्या का रो-रो कर बुरा हाल हो जाना चाहिए था। लेकिन इधर संध्या फेसबुक पर सबके कमेंट पढ़ रही है। वह अपनी सहेली नाज़िया से कहती है कि उसे रोना नहीं आ रहा है और भूख भी दबा कर लग रही है। संध्या की हालत देखकर सबको लगता है कि वह "पगलैट" हो चुकी है। एक विधवा औरत, जिसका पति अभी-अभी मरा हो, उसे कैसा बर्ताव करना चाहिए इसके लिए भी हमारे समाज में एक 'सेट पैटर्न' है। वहीं, संध्या को यह भी पता चलता है कि आस्तिक का किसी दूसरी लड़की के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर था। यह सब जानने के बाद संध्या को आस्तिक से नाराजगी है और वह नाजिया से कहती है कि वह आस्तिक को माफ नहीं करेगी। लेकिन फिर संध्या की मुलाकात होती है आकांक्षा से, जो आस्तिक की गर्लफ्रेंड थी। आकांक्षा से मिलने के बाद संध्या को समझ आता है कि आस्तिक धोखेबाज़ नहीं था। जिसके बाद संध्या उसे माफ़ कर देती है और उसे रोना आ जाता है। इसी बीच घर में इंश्योरेंस वाले आते हैं। घरवालों को पता चलता है कि आस्तिक ने संध्या को नॉमिनी बनाया है और उसके नाम 50 लाख का इंश्योरेंस करवाया है। यह सुनते ही रिश्तेदार संध्या के सास-ससुर के कान भरने लगते हैं। संध्या के ससुराल वाले उसकी शादी आस्तिक के चाचा के बेटे से करवाना चाहते हैं। यह सब लोग खुद ही संध्या की ज़िंदगी का फैसला ले रहे हैं। संध्या भी बड़ों की बात मानकर शादी के लिए हाँ कर देती है। अंत में संध्या दूसरी शादी करेगी या नहीं यह आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगा। 

'पगलैट' फिल्म हमारे समाज के कई पहलुओं को दर्शाती है। इस फिल्म में धर्म, महिलाओं के अधिकार, दूसरी शादी, एक विधवा के व्यवहार, खुद को ओपन माइंडेड कहने वाले कुछ लोगों की असली सोच जैसे मुद्दों को छूने की कोशिश की गई है। निर्देशक उमेश बिष्ट ने कहानी को सहज लेकिन सटीक तरीके से पेश किया है। हालाँकि, कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी ढीली सी लगती हैं लेकिन सभी कलाकारों की एक्टिंग आपको फिल्म के अंत तक बाँधे रखेगी। 

अगर बात की जाए स्टार कास्ट की, तो संध्या के किरदार में सान्या मल्होत्रा ने बेहतरीन अभिनय किया है। उनके हाव-भाव बनावटी नहीं लगते हैं और यही बात इस कहानी में जान डालती है। सान्या के साथ-साथ आशुतोष राणा, शीबा चड्ढा और सायानी गुप्ता ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। रघुबीर यादव और राजेश तैलंग ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है। कुल मिलाकर फिल्म के सभी कलाकारों ने अच्छा काम किया है जिससे कहानी में इंटरेस्ट बनता है। अपने फ्री टाइम में आप भी इस फिल्म को देख सकते हैं।


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