पेश हैं भारत में प्रीत को रीत बनाने वाले एक्टर मनोज कुमार के जीवंत किस्से

अभिनय जगत में मनोज कुमार को पहचान दिलाने व सुपरहिट साबित करने काश रेट निर्माता और फिल्म निर्देशक विजय भट्ट को जाता है जिन्होंने 1962 में फिल्म हरियाली और रास्ता में अभिनेता मनोज कुमार को लीड एक्टर के तौर पर रोल दिया की फिल्म हिट साबित हुई। फिल्म में बतौर को-एक्टर माला सिन्हा को लिया गया था।

Bollywood Halchal Apr 07, 2020

"है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, 'भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं" ऐसे बोल को अमर करने वाले सदी के महान अभिनेता मनोज कुमार जिन्होंने भारत में प्रीत को रीत बना दिया। पेश हैं आज ऐसे अभिनय को सजीव बना देने की ताकत रखने वाले, देशभक्ति से ओतप्रोत गीतों में अभिनय की जिंदादिली से हमेशा-हमेशा के लिए ना भूलने वाले खयाल को अपने किरदारों की बदौलत जिंदा रखने वाले, अद्भुत, विलक्षण प्रतिभा के धनी कलाकार एवं फिल्मनिर्माता मनोज कुमार के जीवंत किस्से-

मनोज कुमार की पैदाइश 24 जुलाई 1937 को एबटाबाद (मौजूदा पाकिस्तान) में हुई थी। विभाजन के समय इनका परिवार दिल्ली के एक शरणार्थी कैंप में आकर रहा। कुछ दिनों बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर इलाके में जाकर बस गए। इनके माता-पिता के द्वारा दिया गया नाम हरिकिशन गिरी गोस्वामी था। फिल्मी जगत में कदम रखने के साथ ही इनके नाम बदलने का सिलसिला शुरू हुआ। पहले मनोज कुमार, उसके बाद भारत फिल्म से हासिल स्टार्डम से इन्हें भारत कुमार के नाम से जाना जाने लगा।

अभिनय जगत में मनोज कुमार को पहचान दिलाने व सुपरहिट साबित करने काश रेट निर्माता और फिल्म निर्देशक विजय भट्ट को जाता है जिन्होंने 1962 में फिल्म हरियाली और रास्ता में अभिनेता मनोज कुमार को लीड एक्टर के तौर पर रोल दिया की फिल्म हिट साबित हुई। फिल्म में बतौर को-एक्टर माला सिन्हा को लिया गया था। माला और मनोज की जोड़ी को फिल्मी पर्दे पर काफी सराहा गया। वैसे मनोज की पहली फिल्म 1957 में रिलीज हुई इनकी पहली फिल्म फैशन में मनोज का रोल एक भिखारी के रूप में था।

मनोज कुमार को जिन खास फिल्मों के लिए याद किया जाता है, उसमें 1962 में प्रदर्शित हरियाली और रास्ता, दस नंबरी, हिमालय की गोद में, सन्यासी, क्लर्क, शहीद, वो कौन थी, उपकार, नीलकमल, पूरब और पश्चिम, शोर, क्रांति, मैदान ए जंग, पत्थर के सनम, आदि फिल्में शामिल हैं।

मनोज कुमार पर फिल्माए गए ये गाने हुए मशहूर

1967 में 'उपकार' फिल्म का गाना 'मेरे देश की धरती'
1970 में आई फिल्म 'पूरब और पश्चिम' का भक्ति गीत 'ओम जय जगदीश हरे'
1965 में 'शहीद' फिल्म का गाना 'सरफरोशी की तमन्ना'
1966 की फिल्म 'दो बदन' का मशहूर रोमांटिक गाना 'लो आ गई उनकी याद'
1970 में आई फिल्म 'पूरब और पश्चिम' का बच्चों की जुबां पर रहने वाला गाना 'ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार'
1976 में आई फिल्म 'दस नंबरी' का गाना 'मुझे दर्द रहता है' काफी हिट रहा

मनोज कुमार को कई पुरस्कारों से नवाजा गया

1992 पद्मश्री
1968 उपकार फिल्म के लिए बतौर निर्देशक और डायलॉग डिलीवरी में फिल्मफेयर अवार्ड
1972 बेईमान फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर अवॉर्ड
1975 रोटी कपड़ा और मकान के निर्देशन के क्षेत्र में फिल्म फेयर
1999 लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
2016- दादा साहब फाल्के अवार्ड

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