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फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले, जानिए किन सितारों ने किया स्ट्रगल लाइफ का सामना

By Bollywood halchal | May 21, 2020

फिल्मी दुनिया में हर किसी को यूं ही बुलंदियां नहीं मिलती यह सौ फ़ीसदी सच है। स्टारडम की चकाचौंध से पहले कितने ही हीरो और हीरोइन व अन्य अभिनेताओं ने अपने जीवन में संघर्ष का घूंट पिया है शायद अपनी स्ट्रगल और स्टारडम के बीच वह खुद को आज भी सामान्य व्यक्ति ही समझते हों लेकिन लोगों के प्यार से उन्हें इन बुलंदियों का स्वाद चखने को मिलता है। आज इस पोस्ट के जरिए हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे ही स्टाफ के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर काफी स्ट्रगल करने के बाद किया।

अमिताभ बच्चन
वैसे तो आज पूरा बॉलीवुड अमिताभ बच्चन को 'बिग बी' कह कर बड़े ही आदर सत्कार से बुलाता है, पूरी दुनिया में अमिताभ के लाखों करोड़ों फैंस हैं। आज अमिताभ बच्चन को पद्म भूषण, पद्म विभूषण व पद्मश्री जैसे भारत के श्रेष्ठ पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, लेकिन फिल्म जगत में जो शोहरत अमिताभ ने हासिल की है, उससे पहले उनके संघर्ष की कहानी और भी रोचक है।
अमिताभ बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत की तो उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप हुईं। साल 1969 में अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' रिलीज हुई, जो उनके करियर की सुपर फ्लॉप फिल्मों में से एक मानी जाती है। लगातार दर्जनों फिल्में फ्लॉप हो जाने के बाद मुंबई के अधिकतर निर्माता व निर्देशक अमिताभ बच्चन को अपनी फिल्मों में रोल देने से कतराने लगे। 1971 में आई फिल्म 'आनंद' से थोड़ी बहुत आशा की किरण अमिताभ बच्चन के लिए जरूर जगी थी।
बात उन दिनों की है, जब प्रकाश मेहरा फिल्म 'जंजीर'(1973) के लिए कास्टिंग कर रहे थे। निर्देशक मेहरा इस असमंजस में थे कि जंजीर में किस एक्टर को लीड रोल के लिए चुना जाए। प्राण साहब इंडस्ट्री में अच्छा काम कर रहे थे, उन्होंने प्रकाश मेहरा को अमिताभ का नाम सुझाया। पहले तो प्रकाश मेहरा ने अमिताभ को कास्ट करने के लिए मना कर दिया लेकिन जब मान गए तो अमिताभ ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाते हुए आखिर पर्दे पर रिलीज़ के साथ ही जंजीर फिल्म को अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में शामिल कर लिया। जंजीर काफी हिट रही और रातों-रात अमिताभ बच्चन लोगों के दिलों पर छा गए।

शाहरुख खान
आज पूरा बॉलीवुड शाहरुख को बादशाह कहकर बुलाता है लेकिन शाहरुख ने जिस तरह से स्ट्रगल करते हुए स्टारडम तक का सफर तय किया है, वह वाकई चुनौती भरा रहा। दिल्ली की गलियों से निकलकर मुंबई बॉलीवुड इंडस्ट्री बादशाह के रुतबे को हासिल करने के बीच शाहरुख खान ने काफी संघर्ष किया।
 
2 नवंबर 1965 को दिल्ली के एक मुस्लिम परिवार में शाहरुख खान का जन्म हुआ था। महज 16 साल की उम्र में शाहरुख के पिता मीर ताज मोहम्मद इन्हें व इनके परिवार को अकेला छोड़ दुनिया से चले गए। शाहरुख ने ऐसे वक्त में हिम्मत से काम लेते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री ली लेकिन एक्टिंग का इतना अधिक शौक था कि पढ़ाई अधूरी छोड़कर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एक्टिंग सीखने के लिए चले गए। शाहरुख ने शुरुआती दौर में फौजी नाम के एक सीरियल में काम करना चालू किया। इसके बाद सर्कस, ईडियट और वागले की दुनिया जैसे कई सीरियलों में शाहरुख खान नजर आए। फिल्मों के रुपहले पर्दे तक पहुंचने के लिए उन्होंने टीवी जगत को जरिया बनाया। 
 
साल 1991 में जब शाहरुख की मां का इंतकाल हो गया तो शाहरुख ने मुंबई जाने का मन बना लिया। मुंबई पहुंच कर 1992 में दीवाना फिल्म से शाहरुख खान ने बॉलीवुड डेब्यू किया। फिल्म अच्छी चली और शाहरुख के करियर में बेहतर बदलाव आए। 
1995 में बॉक्स ऑफिस पर हिट फिल्में देकर शाहरुख ने रोमांस के राजा का खिताब भी अपने नाम किया और आज पूरी दुनिया में शाहरुख के अनगिनत चाहने वाले मौजूद हैं।

अक्षय कुमार
बॉलीवुड में खिलाड़ी कुमार के नाम से मशहूर हो चुके अक्षय आज अपनी काबिलियत के बदौलत एक बेहतर स्टार्डम हासिल कर चुके हैं। राजेश खन्ना की बेटी ट्विंकल खन्ना से उन्होंने शादी की है। लेकिन कभी अक्षय ने अपने जीवन में काफी संघर्ष भी किया। अक्षय ने होटलों में वेटर का काम भी किया। चांदनी चौक की गलियों से निकलकर मुंबई में एक सफल फिल्म अभिनेता बनना अक्षय के लिए काफी चुनौतीपूर्ण सफर रहा। अक्षय ने जब बॉलीवुड का रुखकिया तो लगातार कई फिल्में फ्लॉप हुईं। हाउसफुल 4 के प्रमोशन के दौरान अक्षय ने खुद एक सवाल के जवाब में यह बताया कि वह दौर भी कितना कठिन था जब 14 फिल्में लगातार फ्लॉप हुईं थी। लेकिन संघर्षरत रहते हुए लगातार जारी प्रयासों के बाद आज अक्षय एक सफल हीरो हैं।

रजनीकांत
पद्म भूषण, पद्म विभूषण और इंडियन फिल्म पर्सनालिटी ऑफ द ईयर जैसे पुरस्कारों से नवाजे जा चुके रजनीकांत के संघर्षों के बारे में अंदाजा लगाना भी मुश्किल है, क्योंकि अपने संघर्ष के दिनों में रजनीकांत ने बस के कंडक्टर के रूप में, कुली और  ऑटो ड्राइवर के काम भी किए। रजनीकांत को साउथ के लोग भगवान की तरह पूजते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण रजनीकांत की अभिनय की अद्भुत कला है। 1973 में मद्रास फिल्म संस्थान में एक्टिंग सीखने के लिए रजनीकांत ने दाखिला लिया।रजनीकांत ने अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्म इंडस्ट्री से की थी। रजनीकांत शक्ल से हीरो नहीं लगते थे इसलिए उन्हें ज्यादातर नकारात्मक भूमिकाएं निभाने को मिला करती थीं। आखिरकार अपनी एक्टिंग की जादूगरी के कारण उन्हें फिल्मों में हीरो के रोल भी मिलने लगे और कई भाषाओं में रजनीकांत ने फिल्में की। आज रजनीकांत एक सफल जाने-माने अभिनेता हैं।

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी
नवाजुद्दीन का संघर्ष अपने आप में अलग है क्योंकि जैसा संघर्ष इन्होंने किया है, वो बहुत कम लोगों ने किया। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने करियर के शुरुआती दौर में छोटे-छोटे रोल के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। नवाजुद्दीन को बॉलीवुड में बतौर हीरो स्थापित होने की प्रबल इच्छा थी। दिल्ली में चौकीदार की नौकरी करने वाले नवाज़ुद्दीन सिद्धकी ने फिल्म इंडस्ट्री में काफी संघर्ष किया है। 1999 में आमिर खान की फिल्म सरफरोश में एक छोटे से किरदार की भूमिका में नवाजुद्दीन सिद्दीकी नजर आए कई सालों तक अपनी पहचान बनाने के लिए इन्हें मोहताज रहना पड़ा। मुन्ना भाई एमबीबीएस में नवाजुद्दीन ने छोटे-छोटे रोल किए। लेकिन आज अपनी एक्टिंग के दम पर बतौर हीरो बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना स्थान जमा चुके हैं।

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